मंगलवार 17 फ़रवरी 2026 - 07:12
क़ुरआन सीखने और सिखाने का महत्व

इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने एक परंपरा में एक मोमिन के लिए कुरआन सीखने और सिखाने के महत्व के बारे में बताया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत बिहार उल अनवार किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:

قال الامام الصادق علیه السلام:

«يَنْبَغى لِلْمُؤمِنِ اَنْ لا يَمُوتَ حَتّى يَتَعَلَّمَ القرآنَ، اَوْ يَكُونَ فى تَعَلُّمِهِ.»

इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने फ़रमाया:

एक मोमिन को इस दुनिया से तब तक नहीं जाना चाहिए जब तक वह कुरआन न सीख ले, या उसे सीखते हुए इस दुनिया से न चला जाए।

बिहार उल अनवार, भाग 92, पेज 189।

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